पहली पंचवर्षीय योजना संक्षिप्त परिचय भारत सूचना एवं प्रसारण
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योजना आयोग
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भारत की स्वतंत्रता के बाद देश के समग्र और संतुलित विकास के लिए एक सुव्यवस्थित आर्थिक योजना की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मार्च 1950 में योजना आयोग की स्थापना की गई। योजना आयोग का प्रमुख कार्य देश के उपलब्ध संसाधनों और जनशक्ति का आकलन कर उनके सर्वोत्तम उपयोग हेतु दीर्घकालीन और चरणबद्ध योजनाएँ तैयार करना था। इसके अंतर्गत प्राथमिकताओं का निर्धारण, विकास में आने वाली बाधाओं की पहचान, प्रशासनिक व्यवस्था का निर्माण तथा योजनाओं के क्रियान्वयन की निरंतर समीक्षा शामिल थी। जुलाई 1951 में योजना आयोग ने अप्रैल 1951 से मार्च 1956 तक की प्रथम पंचवर्षीय योजना का प्रारूप प्रस्तुत किया, जिसे व्यापक जन-परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया। इस योजना का उद्देश्य कृषि, सिंचाई, उद्योग, परिवहन, संचार तथा सामाजिक सेवाओं के माध्यम से राष्ट्रीय आय और उत्पादन में वृद्धि करना था। योजना में खेती और सामुदायिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई ताकि खाद्य उत्पादन बढ़ाया जा सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सके। इसके साथ-साथ छोटे और बड़े उद्योगों के विकास, रोजगार सृजन, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पिछड़े वर्गों के उत्थान पर भी विशेष बल दिया गया। योजना का केंद्रीय उद्देश्य जनता के जीवन-स्तर को ऊँचा उठाना, आय और अवसर की असमानताओं को कम करना तथा सामाजिक और आर्थिक न्याय की स्थापना करना था। इसके लिए पूंजी निर्माण, उत्पादन तकनीकों में सुधार, वैज्ञानिक अनुसंधान, सहकारिता के विस्तार तथा राज्य और निजी क्षेत्र के समन्वय पर जोर दिया गया। योजना आयोग ने यह स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आर्थिक नियोजन तभी सफल हो सकता है जब सरकार, राज्य, स्थानीय संस्थाएँ और जनता मिलकर इसमें सक्रिय भागीदारी करें। कुल मिलाकर, पंचवर्षीय योजना भारत में नियोजित आर्थिक विकास की आधारशिला थी, जिसका लक्ष्य सीमित संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग कर तेज़ आर्थिक वृद्धि, रोजगार के अवसरों का विस्तार और एक अधिक समानतापूर्ण तथा न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करना था।
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भारत सरकार योजना आयोग
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Planning Commission - 1955
