वार्षिक योजना 1972-73

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योजना आयोग

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चौथी पंचवर्षीय योजना का मध्यावधि मूल्यांकन दिसम्बर 1971 में प्रकाशित किया गया, जिसमें विकास और सामाजिक न्याय के उद्देश्यों को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए 1972-73 की वार्षिक योजना की दिशा और प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया गया। मूल्यांकन में चार प्रमुख कार्य-दिशाएँ निर्धारित की गईं—योजना का बेहतर कार्यान्वयन एवं अधिक परिव्यय, चिन्हित त्रुटियों का निराकरण, केन्द्र तथा राज्यों द्वारा अतिरिक्त संसाधन जुटाना, तथा रोजगार सृजन और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने वाली योजनाओं पर विशेष बल देना। स अवधि में देश ने बांग्लादेश से विस्थापितों के आगमन, पाकिस्तान के साथ युद्ध तथा पुनर्वास एवं सहायता से जुड़े अतिरिक्त व्ययों का भार उठाते हुए भी योजना परिव्यय में कोई कटौती नहीं की। इसके विपरीत, केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर संसाधन जुटाने के अभूतपूर्व प्रयासों के परिणामस्वरूप योजना व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की गई। केन्द्र और राज्यों दोनों द्वारा अतिरिक्त कराधान, बाजार उधार तथा लघु बचतों के माध्यम से संसाधन एकत्र किए गए, जिससे राज्यों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने में सहायता मिली। 972-73 की वार्षिक योजना में बढ़े हुए परिव्यय का उद्देश्य मध्यावधि मूल्यांकन में चिन्हित कमियों को दूर करना तथा स्वावलम्बन और सामाजिक न्याय को गति देना था। इसके अंतर्गत कृषि उत्पादन, विशेषकर कपास और तिलहन, इस्पात एवं उर्वरक उत्पादन, निर्यात-उन्मुख उद्योगों के आधुनिकीकरण तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से आयात-प्रतिस्थापन को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया।

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भारत सरकार योजना आयोग

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Planning Commission - 1972

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