प्रारूप खण्ड-III राज्य योजनायें प्रवृत्तियां, सरोकार और कार्यानितियां दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007)

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2024-05-08T08:40:15Z
dc.date.available2024-05-08T08:40:15Z
dc.date.issued2002
dc.descriptionयोजना आयोग भारत सरकार
dc.description.abstractदसवीं पंचवर्षीय योजना दस्तावेज के एक भाग के रूप में पहली मरतबा राज्य योजनाओं से संबंधित एक अलग खंड शामिल किया जा रहा है। विगत्‌ में योजना आयोग इन समस्याओं की राज्यवार समीक्षा करता रहा है। राज्य योजनाओं के लिए प्रतिवर्ष पर्याप्त केन्द्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। तथापि अब राष्ट्रीय आयोजना में राज्य स्तर के परि्रेक्षय की प्रासंगिकता बढ़ रही है। विकास संबंधी मुख्य मुद्दों का राज्यवार विश्लेषण करने और उनका समाधान करने की आवश्यकता है ताकि राष्ट्रीय विकास पर नीतियों और कार्यक्रमों का वांछित प्रभाव पड़ सके। विशिष्ट राज्यों से संबंधित मामलों पर यद्यपि समय समय पर नियमित रूप से ध्यान दिया जाता रहा है और राज्य सरकारों का योजना आयोग के साथ विचार विमर्श सतत्‌ आधार पर होता है राज्यों के आर्थिक विकास में कुछ ऐसी प्रवृत्तियां है
dc.identifier.citationPlanning Commission - 2002
dc.identifier.issnC12114
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211/handle/123456789/4054
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/C12114/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesC-4142
dc.titleप्रारूप खण्ड-III राज्य योजनायें प्रवृत्तियां, सरोकार और कार्यानितियां दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007)
dc.title.alternativeयोजना आयोग भारत सरकार
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प्रारूप_खण्ड-III_राज्य_योजनायें_प्रवृत्तियां_सरोकार_कार्यानितियां_दसवीं_पंचवर्षीय_योजना_2002-2007.pdf
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