ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना 2007-2012 भाग-II सामाजिक क्षेत्रक

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2024-05-08T10:49:14Z
dc.date.available2024-05-08T10:49:14Z
dc.date.issued2007
dc.descriptionभारत सरकार योजना आयोग
dc.description.abstractसामाजिक और आर्थिक प्रगति साकार करने में शिक्षा की भूमिका सर्वविदित है। यह व्यक्तिगत और समूहगत दोनों अधिकारों को दिलाने के लिए अवसर खोलती है। युवा विकास के अपने व्यापक रूप में शिक्षा कौशल और ज्ञान के साथ लोगों को सशक्त बनाने तथा भविष्य में उन्हें लाभकारी रोजगार प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। शिक्षा में सुधार से न केवल दक्षता बढ़ने की उम्मीद होती है अपितु इससे जीवन की सम्रग योग्यता में भी वृद्धि होती है। ग्यारहवीं योजना में तीव्र और समावेशी विकास प्राप्त करने के लिए प्रमुख साधन के रूप में शिक्षा को सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है। यह शिक्षा संरचना के सभी खंडों को शामित्र करके शिक्षा क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए एक विस्तृत रणनीति प्रस्तुत करती है।
dc.identifier.citationPlanning Commission - 2007
dc.identifier.issnC16838
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211/handle/123456789/4069
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/C16838/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesC-4159
dc.titleग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना 2007-2012 भाग-II सामाजिक क्षेत्रक
dc.title.alternativeभारत सरकार योजना आयोग
dc.typeReport

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ग्यारहवीं_पंचवर्षीय_योजना_2007-2012_भाग-II_सामाजिक_क्षेत्रक.pdf
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