वार्षिक रिपोर्ट 1995-96

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योजना आयोग

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यह दस्तावेज़ जुलाई 1991 से प्रारंभ किए गए भारत सरकार के आर्थिक सुधारों का एक समग्र सिंहावलोकन प्रस्तुत करता है, जिन्हें स्थिरीकरण तथा ढांचागत समायोजन उपायों के रूप में लागू किया गया। स्थिरीकरण नीति का प्रमुख उद्देश्य समग्र मांग को अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक वृद्धि क्षमता के अनुरूप लाना, आंतरिक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना तथा भुगतान संतुलन की स्थिति में सुधार करना था। इसके अंतर्गत राजकोषीय घाटे में कमी, मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण तथा विनिमय दर में समायोजन जैसे उपाय अपनाए गए। इसके साथ ही ढांचागत समायोजन उपायों का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के पूर्ति पक्ष को सुदृढ़ बनाना, राष्ट्रीय संसाधनों के बेहतर आवंटन और उपयोग को सुनिश्चित करना तथा अर्थव्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना था। औद्योगिक लाइसेंसिंग की समाप्ति, कीमतों और ब्याज दरों का विनियंत्रण, विदेशी व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और विदेशी निवेश का उदारीकरण इन सुधारों के प्रमुख तत्व थे। इन नीतियों के माध्यम से बाजार-आधारित तंत्र को बढ़ावा देने, राज्य हस्तक्षेप को सीमित करने तथा निजी क्षेत्र की भूमिका को विस्तारित करने का प्रयास किया गया, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास के मार्ग को अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

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भारत सरकार योजना आयोग

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Planning Commission - 1996

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