द्वितीय पंचवर्षीय योजना-जिला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2024-02-09T09:05:52Z
dc.date.available2024-02-09T09:05:52Z
dc.date.issued1957-02
dc.description.abstractयह नियोजन का युग है। कई देश नियोजन को किसी न किसी रूप में अपनाने की बात सोचते है । हमारी आवश्यकतायें तो अनेक हैं किन्तु साधन बहुत ही सीमित हैं । हमें इन सीमित साधनी का अधिकतम व सुचारु रूप से उपयोग कर न्यूनतम अवधि में अपनी अधिकाधिक आवश्यकताओं की पूर्ति करनी है । इसलिये यह नितान्त आवश्यक है कि आवश्यकताओं की पूर्ति का एक कम अथवा प्राथमिकता स्थिर की जाय और साधनों का सदुपयोग इस प्रकार किया जाय कि उसमे अधिकतम लाभ हो और व्यवस्थित रूप से व्यक्ति तथा समाज की उत्तरोत्तर उन्नति हो सके । प्रत्येक देश को अपनी स्थानीय परिस्थितियों, आवश्यकताओं, साधनों तथा राजनैतिक व सामाजिक संगठनों के अनुसार नियोजन का रूप निश्चित करना होगा। अब तक नियोजन का प्रयोग सफल रूप से उन्हीं देशों ने किया है जिनकी शासन व्यवस्था अधिनायकतंत्रमूलक है ।
dc.identifier.citationPlanning Commission - 1957
dc.identifier.issn19021
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211/handle/123456789/3385
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/19021/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesD-4-1173-C-3175; D-4-1173
dc.titleद्वितीय पंचवर्षीय योजना-जिला सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश
dc.title.alternativeविकास अन्वेषणालय प्रकाशन संख्या १०३
dc.typeBook

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द्वितीय_पंचवर्षीय_योजना-जिला_सुल्तानपुर_उत्तर_प्रदेश.pdf
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