शारदा सहायक परियोजना का मूल्यांकन अध्ययन सारदा बैराज लखीमपुर, उत्तर प्रदेश

dc.contributor.authorPlanning Commission
dc.date.accessioned2023-11-10T06:10:32Z
dc.date.available2023-11-10T06:10:32Z
dc.date.issued2007-03
dc.description.abstract"भारतीय कृषि का उतार-चढ़ाव या इसकी विफलता मुख्यतः माँनसून पर निर्भर है। मौसम के दौरान कितनी और कब, कहाँ वर्षा होगी इसका सही अनुमान पहले नहीं लग पाता और इससे सूखा, बाढ़ आदि जैसी तबाही उत्पन्न होती है। भारतीय कृषि पर दूरगामी प्रभाव डालने वाली माँनसून की विशिष्ट विशेषता को अनुभव करते हुए भारतीय किसानों को सतही (सर्फेस) सिंचाई के माध्यम से सुनिश्चित सिंचाई की व्यवस्था करने में सरकार की दखल को, छठे दशक के पूर्वार्ध में हरित क्रांति की सफलता के बाद, सर्वाधिक महत्व दिया गया। शारदा सहायक परियोजना (शा. स. प.) भी 1968 में एक ऐसी ही सरकारी दखल था जिसमें 1926 में चालू की गई शारदा नहर परियोजना (शा.न.प.) के कमान क्षेत्र के अधीन आने वाले अनारक्षित क्षेत्रों के लिए नहर से सिंचाई की व्यवस्था की गई थी। शारदा सहायक परियोजना की 260 किमी. लम्बी फीडर नाली जो कि लखीमपुर खीरी जिले के शारदा नगर गाँव में अवस्थित शारदा नदी के तट से निकलती है, जो मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों के लिए नहर से सिंचाई की व्यवस्था करती है। शारदा सहायक परियोजना का उद्देश्य 70% सिंचाई तीव्रता के साथ 16.77 लाख हेक्टेयर कृष्य कमान क्षेत्र (कृ. क.क्षे.) की सिंचाई करना है। यह परियोजना लगभग 1300 करोड़ रूपए की लागत से वर्ष 2000 में पूरी की गई थी। "
dc.identifier.citationPlanning Commission - 2007-03
dc.identifier.issnC19804
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211/handle/123456789/382
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/C19804/index.html
dc.language.isohindi
dc.publisherPlanning Commission
dc.relation.ispartofseriesC-355; C19804
dc.titleशारदा सहायक परियोजना का मूल्यांकन अध्ययन सारदा बैराज लखीमपुर, उत्तर प्रदेश
dc.title.alternativeकार्यक्रम मूल्यांकन संगठन योजना आयोग भारत सरकार
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शारदा_सहायक_परियोजना_मूल्यांकन_अध्ययन_सारदा_बैराज_लखीमपुर_ उत्तर प्रदेश.pdf
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