उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास संबंधी चुनौतियां योजना आयोग के विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट

dc.contributor.authorयोजना आयोग
dc.date.accessioned2026-02-09T09:18:54Z
dc.date.available2026-02-09T09:18:54Z
dc.date.issued2008
dc.descriptionभारत सरकार योजना आयोग
dc.description.abstractयोजना आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट “उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास संबंधी चुनौतियाँ” भारत के उन क्षेत्रों में व्याप्त असंतोष, उपद्रव और नक्सलवादी उग्रवाद के सामाजिक-आर्थिक एवं संस्थागत कारणों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। मई 2006 में गठित इस 46-सदस्यीय समूह का उद्देश्य यह समझना था कि किस प्रकार विकास की असमान प्रक्रियाएँ, शासन तंत्र की विफलताएँ और ऐतिहासिक वंचनाएँ ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में दीर्घकालिक अशांति को जन्म देती हैं। रिपोर्ट का आधार व्यापक विचार-विमर्श, क्षेत्रीय दौरों, विशेषज्ञ लेखों और सामूहिक सहमति से तैयार किया गया विश्लेषण है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि विस्थापन, वन एवं प्राकृतिक संसाधनों पर परंपरागत अधिकारों का ह्रास, भूमि सुधारों का कमजोर कार्यान्वयन, सूदखोरी, भूमि से बेदखली तथा पंचम अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन न होना, असंतोष के प्रमुख कारण हैं। तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद सामाजिक-आर्थिक असमानताओं का बढ़ना, ग्रामीण-शहरी विभाजन, तथा हाशिये पर रहने वाले समुदायों को बुनियादी सेवाओं और सम्मानजनक जीवन से वंचित किया जाना, उग्रवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ पैदा करता है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि संवैधानिक और सांविधिक संस्थाएँ सामाजिक न्याय, समान गरिमा और अधिकारों की रक्षा करने में अपेक्षित भूमिका निभाने में असफल रही हैं। राज्य की प्रतिक्रियाएँ प्रायः तात्कालिक और सुरक्षा-केंद्रित रही हैं, जबकि समस्या की जड़ में मौजूद संरचनात्मक और विकासात्मक कारणों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। पाँच अध्यायों में विभाजित यह रिपोर्ट नक्सलवादी उग्रवाद के ऐतिहासिक संदर्भ, जनजातीय और ग्रामीण संकट, शासन तंत्र की विफलताओं तथा राज्य की प्रतिक्रिया का विश्लेषण करते हुए विकास-आधारित समाधान प्रस्तुत करती है। निष्कर्षतः रिपोर्ट इस बात पर बल देती है कि उग्रवाद से निपटने के लिए मानवीय, लोकतांत्रिक और समावेशी विकास रणनीति आवश्यक है, जिसमें भूमि, संसाधन, अधिकार और गरिमा को केंद्र में रखकर नीतिगत एवं संस्थागत सुधार किए जाएँ।
dc.identifier.citationPlanning Commission - 2008
dc.identifier.issnC14261
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:4000/handle/123456789/6214
dc.identifier.urihttp://10.21.131.211:8080/eBook/C14261/index.html
dc.language.isoother
dc.publisherयोजना आयोग
dc.relation.ispartofseriesC-6419
dc.subjectउग्रवाद प्रभावित क्षेत्र
dc.subjectयोजना आयोग विशेषज्ञ समूह
dc.subjectनक्सलवादी उग्रवाद
dc.subjectग्रामीण असंतोष
dc.subjectजनजातीय मुद्दे
dc.subjectपंचम अनुसूचित क्षेत्र
dc.subjectभूमि सुधार विफलता
dc.subjectविस्थापन और वन अधिकार
dc.subjectसामाजिक-आर्थिक असमानता
dc.subjectशासन तंत्र की विफलता
dc.subjectराज्य की प्रतिक्रिया
dc.subjectविकासात्मक सिफारिशें
dc.titleउग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास संबंधी चुनौतियां योजना आयोग के विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट
dc.title.alternativeभारत सरकार योजना आयोग
dc.typeReport

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उग्रवाद_प्रभावित_क्षेत्रों_में_विकास_संबंधी_चुनौतियां_योजना_आयोग_के_विशेषज्ञ_समूह_की_रिपोर्ट.pdf
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