आठवीं पंचवर्षीय योजना 1992-97 खंड-I

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Planning Commission

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आठवीं योजना विश्व तथा भारत में हो रहे महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों के समय शुरू की जा रही है. अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक तथा आर्थिक व्यवस्था की प्रतिदिन पुनर्संरचना की जा रही है तथा 20वीं शताब्दी की समाप्ति के साथ-साथ इसकी कई विशिष्ट विचारधाराओं और लक्षणों का लोप हो गया है. इस गतिशील विश्व में हमारी नीतियां भी बदलती हुई वास्तिविकताओं के अनुरूप होना चाहिए. हमारी मूलभूत नीतियां हमारे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई हैं तथा उनमें आवश्यक लचीलापन है जिससे हम अपने देशवासियों के समृद्ध एवं न्यायपूर्ण जीवन के लिए सतत प्रयत्नशील रह सकते हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात से आयोजना हमारी नीति स्तंभों में से एक रही है तथा हमारी वर्तमान शक्ति उसकी उपलब्धियों को देन है| आजकल यह एक मान्यता है कि क्रियाकलाप के कई क्षेत्रों में विकास को अनावश्यक नियंत्रणों तथा विनियमों तथा राज्य के हस्तक्षेप से मुक्त करके ही सर्वोत्तम रूप में सुनिश्चित किया जा सकता है. साथ ही हमारा यह विश्वास है कि देश की संवृद्धि तथा विकास को पूर्णतः बाजार-व्यवस्था पर नहीं छोड़ा जा सकता है. क्रयशक्ति समर्थित "मांग" तथा "पूर्ति" के बीच संतुलन लाने की अपेक्षा बाजार से की जा सकती है. किन्तु बाजार " आवश्यकता" तथा "पूर्ति" के बीच संतुलन सुनिश्चित नहीं कर सकता है. बाजार व्यवस्था को ऐसी कमियों को दूर करने के लिए आयोजना आवश्यक है|

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Planning Commission - 1992

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