सांतवी पंचवर्षीय योजना 1985-90 मध्यावधि मूल्यांकन

Abstract

प्रस्तुत विवरण सातवीं पंचवर्षीय योजना की मध्यावधि स्थिति, उपलब्धियों, कमजोरियों तथा भविष्य की चुनौतियों का समग्र विश्लेषण करता है। योजना के प्रारम्भिक वर्षों में अर्थव्यवस्था की संवृद्धि अपेक्षाकृत संतोषजनक रही है तथा औद्योगिक उत्पादन, आधारभूत संरचना और सेवा क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है। संरचनात्मक बाधाओं में कमी, प्रौद्योगिकीय संवृद्धि में निरंतरता तथा गरीबी उन्मूलन और रोजगार कार्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण से विकास प्रक्रिया को गति मिली है। शिक्षा से संबंधित नई राष्ट्रीय नीति के परिणामस्वरूप मानव संसाधन विकास को भी नई दिशा प्राप्त हुई है। इसके बावजूद योजना अवधि के दौरान देश के विभिन्न भागों में पड़े भीषण सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने कृषि क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कृषि उत्पादन में धीमी वृद्धि, सिंचाई विस्तार में कमी, उच्च उपज वाले बीजों के सीमित प्रसार तथा उर्वरक खपत में अपेक्षित वृद्धि न हो पाना प्रमुख चिंता के विषय बने हुए हैं। कृषि की कमजोर स्थिति का प्रतिकूल प्रभाव रोजगार, आय वितरण और गरीबी उन्मूलन के लक्ष्यों पर पड़ने की आशंका व्यक्त की गई है।

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भारत सरकार योजना आयोग

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Planning Commission - 1988

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